पेरोल
ग्रॉस सैलरी
ग्रॉस सैलरी किसी अवधि में कटौती से पहले की कुल कमाई है, जिसमें बेसिक, भत्ते और वेरिएबल पे शामिल हैं।
ग्रॉस वह है जो महीने का सैलरी स्ट्रक्चर जोड़कर बनता है: बेसिक, HRA, स्पेशल अलाउंस, कन्वेयंस और महीने का ओवरटाइम या इंसेंटिव। नियोक्ता का अंशदान इसमें शामिल नहीं होता।
PF, ESI, प्रोफेशनल टैक्स और इनकम टैक्स जैसी कटौतियाँ ग्रॉस से घटाकर नेट पे निकलता है।
भारतीय पेरोल में
कई कानूनी सीमाएँ ग्रॉस पर परखी जाती हैं: ESI कवरेज ₹21,000 महीना पर, बोनस पात्रता ₹21,000 पर, और ज़्यादातर राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स स्लैब।
ग्रॉस सैलरी क्या है?
ग्रॉस सैलरी किसी अवधि में कटौती से पहले की कुल कमाई है, जिसमें बेसिक, भत्ते और वेरिएबल पे शामिल हैं।
भारतीय पेरोल में ग्रॉस सैलरी क्यों मायने रखता है?
कई कानूनी सीमाएँ ग्रॉस पर परखी जाती हैं: ESI कवरेज ₹21,000 महीना पर, बोनस पात्रता ₹21,000 पर, और ज़्यादातर राज्यों में प्रोफेशनल टैक्स स्लैब।
In Kuzhu
Kuzhu का Payroll मॉड्यूल वह जगह है जहाँ ग्रॉस सैलरी संभाला जाता है, उसी कर्मचारी रिकॉर्ड पर जिस पर बाकी सब कुछ।