भर्ती और ऑनबोर्डिंग
बैकग्राउंड वेरिफ़िकेशन (BGV)
बैकग्राउंड वेरिफ़िकेशन जॉइनिंग से पहले या तुरंत बाद उम्मीदवार की पहचान, शिक्षा, पिछली नौकरी, पता और आपराधिक रिकॉर्ड जाँचता है।
आम तौर पर उम्मीदवार की सहमति से वेरिफ़िकेशन एजेंसी के ज़रिए, दस्तावेज़ों और रेफरेंस कॉल के आधार पर। निष्कर्ष ग्रेड किए जाते हैं और कन्फ़र्मेशन से पहले विसंगतियों पर चर्चा होती है।
ऑफर आम तौर पर साफ़ रिपोर्ट पर सशर्त होता है।
भारतीय पेरोल में
IT सेवाएँ और फाइनेंस कंपनियाँ लगभग सबकी जाँच करती हैं; मैन्युफैक्चरिंग अक्सर सुपरवाइज़र और ऊपर की। स्थिति कर्मचारी रिकॉर्ड में ट्रैक करें ताकि प्रोबेशन समीक्षा के पास जवाब हो।
बैकग्राउंड वेरिफ़िकेशन (BGV) क्या है?
बैकग्राउंड वेरिफ़िकेशन जॉइनिंग से पहले या तुरंत बाद उम्मीदवार की पहचान, शिक्षा, पिछली नौकरी, पता और आपराधिक रिकॉर्ड जाँचता है।
भारतीय पेरोल में बैकग्राउंड वेरिफ़िकेशन (BGV) क्यों मायने रखता है?
IT सेवाएँ और फाइनेंस कंपनियाँ लगभग सबकी जाँच करती हैं; मैन्युफैक्चरिंग अक्सर सुपरवाइज़र और ऊपर की। स्थिति कर्मचारी रिकॉर्ड में ट्रैक करें ताकि प्रोबेशन समीक्षा के पास जवाब हो।
In Kuzhu
Kuzhu का Recruitment (ATS) मॉड्यूल वह जगह है जहाँ बैकग्राउंड वेरिफ़िकेशन (BGV) संभाला जाता है, उसी कर्मचारी रिकॉर्ड पर जिस पर बाकी सब कुछ।