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भर्ती और ऑनबोर्डिंग

एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम (ATS)

एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम नौकरी की रिक्तियों, आवेदनों, इंटरव्यू चरणों और ऑफर को एक पाइपलाइन में संभालता है, ताकि भर्ती दिखाई दे और मापी जा सके।

रिक्विज़िशन मंज़ूर होते हैं, नौकरियाँ प्रकाशित होती हैं, उम्मीदवार खोजे जाकर हर चरण पर फ़ीडबैक के साथ आगे बढ़ते हैं। ऑफर टेम्पलेट से बनते हैं और स्वीकृत उम्मीदवार ऑनबोर्डिंग में जाते हैं।

टाइम-टू-हायर, हायरिंग के स्रोत और फ़नल कन्वर्ज़न की रिपोर्ट उसी डेटा से आती हैं।

भारतीय पेरोल में

ज़्यादातर भारतीय SMB Naukri, LinkedIn और रेफरल से भर्ती करते हैं और छठी खुली भूमिका तक स्प्रेडशीट में ट्रैक करते हैं। ATS उस दिन अपनी कीमत वसूल करता है जब दो इंटरव्यूअर इस पर असहमत हों कि किसे अस्वीकार किया गया।

एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम (ATS) क्या है?

एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम नौकरी की रिक्तियों, आवेदनों, इंटरव्यू चरणों और ऑफर को एक पाइपलाइन में संभालता है, ताकि भर्ती दिखाई दे और मापी जा सके।

भारतीय पेरोल में एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम (ATS) क्यों मायने रखता है?

ज़्यादातर भारतीय SMB Naukri, LinkedIn और रेफरल से भर्ती करते हैं और छठी खुली भूमिका तक स्प्रेडशीट में ट्रैक करते हैं। ATS उस दिन अपनी कीमत वसूल करता है जब दो इंटरव्यूअर इस पर असहमत हों कि किसे अस्वीकार किया गया।

In Kuzhu

Kuzhu का Recruitment (ATS) मॉड्यूल वह जगह है जहाँ एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम (ATS) संभाला जाता है, उसी कर्मचारी रिकॉर्ड पर जिस पर बाकी सब कुछ।